शिक्षक का विद्यार्थी जीवन पर प्रभाव


किसी ने शिक्षक से पूछा-क्या करते हो आप !
शिक्षक का सुन्दर जवाब देखिए-
“सुन्दर सुर सजाने को साज बनाता हूँ ।
नौसिखिये परिंदों को बाज बनाता हूँ ।।
चुपचाप सुनता हूँ शिकायतें सबकी ।
तब दुनिया बदलने की आवाज बनाता हूँ !
समंदर तो परखता है हौंसले कश्तियों के ।
और मैं डूबती कश्तियों को जहाज बनाता हूँ !
बनाए चाहे चांद पे कोई बुर्ज ए खलीफा ।
अरे मैं तो कच्ची ईंटों से ही ताज बनाता हूँ!




शिक्षक केवल ज्ञान देने वाला व्यक्ति नहीं होता, बल्कि वह एक मार्गदर्शक, प्रेरणादायी शक्ति और आदर्श भी होता है। विद्यार्थी जीवन वह अवस्था है जहाँ व्यक्तित्व का निर्माण होता है, और इसमें शिक्षक की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। जिस प्रकार एक माली पौधों को पानी, खाद और सुरक्षा देकर उन्हें हरा-भरा करता है, उसी प्रकार शिक्षक अपने विद्यार्थियों को शिक्षा, संस्कार और अनुशासन देकर उनके जीवन को सफल बनाता है।

1. ज्ञान का स्रोत

विद्यार्थी जीवन का मुख्य उद्देश्य शिक्षा प्राप्त करना है। इस शिक्षा का मार्गदर्शन शिक्षक ही करता है। पाठ्यपुस्तक में लिखी बातें तभी सार्थक होती हैं जब शिक्षक उन्हें सरल और रोचक ढंग से समझाता है। उदाहरण के लिए, डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने स्वयं कहा था कि उनके शिक्षक आयर ने गणित और विज्ञान को इतनी सरलता से समझाया कि उनमें वैज्ञानिक बनने की जिज्ञासा जागी। यह उदाहरण दर्शाता है कि एक शिक्षक विद्यार्थी की दिशा बदल सकता है।

2. चरित्र निर्माण

केवल पाठ्य ज्ञान ही जीवन को सफल नहीं बनाता, बल्कि अच्छे संस्कार और चरित्र भी आवश्यक होते हैं। शिक्षक अपने आचरण, व्यवहार और जीवनशैली से विद्यार्थियों को सत्य, ईमानदारी, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा का पाठ पढ़ाता है। कहा जाता है कि “विद्यार्थी वही बनता है जो वह अपने शिक्षक से सीखता है।”
महात्मा गांधी भी अपने विद्यालय के दिनों में अपने शिक्षक के आदर्शों से प्रभावित हुए थे, जिसने उन्हें सत्य और अहिंसा का मार्ग अपनाने की प्रेरणा दी।

3. प्रेरणा और आत्मविश्वास का विकास

विद्यार्थी जीवन में असफलताएँ और निराशाएँ आती रहती हैं। ऐसे समय में शिक्षक ही वह व्यक्ति होता है जो छात्र को प्रेरित करता है और आगे बढ़ने का साहस देता है।
एक छोटी सी कहानी याद आती है—थॉमस एडिसन बचपन में बहुत कमजोर विद्यार्थी माने जाते थे। एक बार उनके स्कूल के शिक्षक ने उन्हें “निकम्मा” कहकर स्कूल से निकाल दिया। लेकिन उनकी माँ, जो उनकी पहली शिक्षिका थीं, ने उन पर विश्वास किया और कहा—“तुम महान कार्य करोगे।” यही प्रेरणा उन्हें बल्ब का आविष्कारक बनाने में सहायक बनी।

4. सही मार्गदर्शन

जीवन में कब, किस दिशा में आगे बढ़ना है, यह समझना विद्यार्थी के लिए कठिन होता है। शिक्षक अपने अनुभव और ज्ञान से विद्यार्थियों को सही दिशा दिखाते हैं।
स्वामी विवेकानंद को उनके गुरु रामकृष्ण परमहंस ने जीवन का सच्चा उद्देश्य दिखाया। यदि विवेकानंद को अपने गुरु का मार्गदर्शन न मिला होता, तो शायद वे विश्वपटल पर भारत की संस्कृति का डंका न बजा पाते।

5. सामाजिक और नैतिक मूल्य

विद्यार्थी जीवन केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित नहीं होता, बल्कि समाज के प्रति उत्तरदायित्व भी सिखाता है। शिक्षक विद्यार्थियों को सामाजिक सेवा, सहयोग, करुणा और भाईचारे का महत्व बताते हैं। वे समझाते हैं कि शिक्षा का उद्देश्य केवल नौकरी पाना नहीं, बल्कि एक अच्छा नागरिक बनना है।
डॉ. कलाम अक्सर कहते थे कि शिक्षक बच्चों में “मानवता और राष्ट्रभक्ति” की भावना जगाते हैं।

6. अनुशासन और समय प्रबंधन

शिक्षक विद्यार्थी को समय का महत्व समझाते हैं। नियमित पढ़ाई, अभ्यास और अनुशासन का महत्व शिक्षक ही सिखाते हैं। अनुशासित जीवन ही सफलता की कुंजी है।
इतिहास गवाह है कि चाणक्य ने अपने शिष्य चंद्रगुप्त को अनुशासन और नेतृत्व की शिक्षा दी, जिसके बल पर चंद्रगुप्त ने महान मौर्य साम्राज्य की स्थापना की।

7. जीवनभर का प्रभाव

शिक्षक का प्रभाव केवल विद्यार्थी जीवन तक सीमित नहीं रहता। कई बार शिक्षक की शिक्षा, उसकी कही हुई बातें या दिया गया मार्गदर्शन जीवनभर स्मरण रहता है।
अब्दुल कलाम ने कहा था—“यदि मैं शिक्षक न होता, तो शायद राष्ट्रपति भी न बन पाता।” यह वाक्य स्पष्ट करता है कि शिक्षक जीवन की दिशा बदलने वाला दीपक है।

8. शिक्षक के रूप में आदर्श

विद्यार्थी अपने शिक्षक को आदर्श मानते हैं। शिक्षक का पहनावा, बोलचाल, व्यवहार, अध्ययन की शैली—सब कुछ विद्यार्थी पर गहरा असर डालता है। एक आदर्श शिक्षक वह होता है जो अपने आचरण से विद्यार्थियों को सही राह दिखाता है।

निष्कर्ष

विद्यार्थी जीवन को सही दिशा देने में शिक्षक का योगदान अमूल्य है। एक अच्छा शिक्षक केवल किताबों का ज्ञान नहीं देता, बल्कि जीवन जीने की कला भी सिखाता है। वह विद्यार्थी को एक अच्छा इंसान, जिम्मेदार नागरिक और सफल व्यक्तित्व बनाने में मदद करता है। समाज के निर्माण में शिक्षक की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है।

इसीलिए कहा गया है—
गुरु बिन ज्ञान न उपजे, गुरु बिन मिलता न मोक्ष।
गुरु ही है जीवन का दीपक, जो अंधकार को हर लेता है।”

👉 इस प्रकार शिक्षक का प्रभाव विद्यार्थी जीवन पर जीवनभर अमिट छाप छोड़ता है और उसे सफलता, संस्कार तथा आदर्श की राह दिखाता है।

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